ईश्वरीय विश्वविद्यालय में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ महाशिवरात्रि मनाई गई :: डॉ एमपी सिंह

ईश्वरीय विश्वविद्यालय में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ महाशिवरात्रि मनाई गई डॉ एमपी सिंह

18 फरवरी 2023 प्रजापिता ब्रह्मा कुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय मे सेंटर की संस्थापिका हरीश दीदी के द्वारा उक्त कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें देश के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद समाजशास्त्री दार्शनिक प्रोफेसर एमपी सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान शिव के रूप स्वरूप और जीवन से सीख लेनी चाहिए क्योंकि आदिनाथ अपने गले में सर्प डाले हुए हैं और नंदी की सवारी पर सवार है पर्वत पर रहते हैं कंदमूल खाते हैं इससे लगता है कि वह पर्यावरण प्रेमी है लेकिन आज इंसान कच्चे पहाड़ों को तोड़ रहा है वनों को उजाड़ रहा है और पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है इसका मतलब है कि हम भगवान शिव के विपरीत चल रहे हैं उन्होंने कहा कि भोलेनाथ जटा जूट और कपाल धारण करते हैं शरीर पर भस्म और भभूत लगाते हैं जिससे सीख मिलती है कि हमें किसी भ्रम व कल्पना में नहीं रहना चाहिए क्योंकि मानव शरीर एक दिन मुट्ठी भर राख ही हो जाएगा डॉ एमपी सिंह ने कहा कि भगवान शिव का स्थान कैलाश पर्वत बताया जाता है जो कि जमीन से 52 किलोमीटर की ऊंचाई पर है जिस पर चढ़ पाना संभव नहीं है इससे सीख मिलती है की हमें भी अधिक भौतिकवाद की दुनिया में नहीं रहना चाहिए शिव और गोरा के जीवन से सीख लेनी चाहिए कि उनके रिश्तो में झूठ फरेब घमंड गुस्सा और धोखा नहीं था लेकिन हम सभी के जीवन में उक्त सभी बातें मौजूद हैं और इसीलिए रिश्ते टूट रहे हैं डॉ एमपी सिंह ने कहा कि भगवान शिव ने अनेकों राक्षसों का संहार किया क्योंकि वह अन्याय के खिलाफ थे और बुराई को जड़ से खत्म करना चाहते थे यह गुण हमें अपने व्यक्तित्व में शामिल करना चाहिए उन्होंने समुद्र मंथन के दौरान उत्पन्न हलाहल नामक जहर को भी पी लिया था इसका मतलब है कि उन्होंने नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदल कर नीलकंठ कहलाए वह हमेशा अपने पास त्रिशूल रखते थे ताकि अहंकार को नियंत्रण में रखा जा सके अहंकार को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए यह गुण भी अपनाने योग्य है यदि उक्त गुणों को हम अपना लें तो आज भी कलयुग से मुक्ति मिल सकती है और महा शिवरात्रि मनाने का मकसद भी पूरा हो जाएगा इस अवसर पर बीके ज्योति ने डॉ एमपी सिंह को गुलदस्ता देकर स्वागत किया