घर में रखी 75 वर्ष से अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां भी बनेंगी राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण अभियान का हिस्सा : एडीसी
*घर में रखी 75 वर्ष से अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां भी बनेंगी राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण अभियान का हिस्सा : एडीसी*
*- ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों का डेटाबेस किया जा रहा है तैयार*
*- आम नागरिक हस्तलिखित पांडुलिपियों की जानकारी वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से कर सकते हैं साझा*
सर्वप्रिय भारत/फरीदाबाद, 26 मई।
‘ज्ञान भारतम्’ मिशन के तहत भारत की समृद्ध परम्परा, सांस्कृतिक धरोहर एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्राचीन हस्त लिखित पाण्डुलिपियां, ताड़पत्र एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण एवं भावी पीढिय़ों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है। यह जानकारी देते हुए हुए अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) अंजलि श्रोत्रिया ने बताया कि इस मिशन का उद्देश्य भारत भर में शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों तथा निजी संग्रहों में उपलब्ध हस्त लिखित पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, प्रलेखन, संरक्षण, डिजिटलीकरण कर उन्हें सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा कि इन हस्तलिखित पांडुलिपियों को समय के प्रभाव से बचाने के लिए उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि किसी के पास घर में 75 वर्ष या इससे अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों का संग्रह है तो वो भी उन्हें साझा कर सकते हैं।
उन्होंने सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में जहां भी वर्षों पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, जिनमें धार्मिक ग्रंथ, ऐतिहासिक दस्तावेज और पारंपरिक ज्ञान का अनमोल भंडार मौजूद है, कि पहचान की जाए ताकि उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। उन्होंने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए ताकि इस मिशन में सभी की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
15 जून तक जारी है सर्वेक्षण का कार्य :
एडीसी अंजलि श्रोत्रिया ने बताया कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत लगभग 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार की ओर से सर्वे कार्य को तीन माह के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो गत 16 मार्च से शुरू हो चुका है और 15 जून तक जारी रहेगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से डिजिटलीकरण और संरक्षण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से जिले की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
