बाबा साहेब ने दिलवाया गरीब व पिछड़ों को समानता का अधिकार : पं. राजेंद्र शर्मा


आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हर्षाेल्लास से मनाया बाबा भीमराव अंबेडकर का जन्मदिवस
फरीदाबाद। 
भारत के संविधान निर्माता बाबा भीमराव अंबेडकर की 131वीं जयंती आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हर्षाेल्लास के साथ मनाई। इस अवसर पर पूर्व लोकसभा प्रत्याशी एवं आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता पंडित राजेंद्र शर्मा सहित अन्य आप नेताओं ने बल्लभगढ़ चौक पर स्थित बाबा साहेब की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से व्यापारी संगठन साउथ जोन हरियाणा संयोजक अमन गोयल, हरेंद्र भाटी कोषाध्यक्ष साउथ जोन हरियाणा, भाई खैमी ठाकुर वरिष्ठ नेता आम आदमी पार्टी, संतोष यादव संयोजक प्रवासी प्रकोष्ठ साउथ जोन हरियाणा, नरेंद्र चौधरी, चिराग अग्रवाल, मनीष शर्मा, अमर सिंह, दिनेश मंगला, इकबाल सहित अनेकों आप कार्यकर्ता मौजूद थे। इस मौके पर आप कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब अमर रहे के गगनचुंबी नारे भी लगाए। इस अवसर पर उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए पंडित राजेंद्र शर्मा ने कहा कि बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर गरीब, पिछड़े एवं दलित समाज के सच्चे सुधारक थे, उन्होंने देश से जाति-पाति का भेदभाव मिटाकर सभी को समान अधिकार दिलवाने का प्रयास किया और गरीब व पिछड़ों को भी समाज की मुख्य धारा से जोडऩे का काम किया। श्री शर्मा ने कहा कि बाबा भीमराव ने अपना जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया और उन्होंने सदैव गरीब व पिछड़ों के हकों के लिए आवाज उठाई और उन्हें भी एक समान अधिकार दिए जाने की मांग उठाकर समानता का अधिकार दिलवाया। उन्होंने कहा कि आज उनके जन्मदिवस पर हम सभी को उनके आदर्शाे को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए, यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर हरेंद्र भाटी, संतोष यादव व अमन गोयल ने भी संयुक्त रूप से बाबा साहेब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भीमराव आम्बेडकर प्रतिभाशाली एवं जुंझारू लेखक थे। आम्बेडकर को पढने में बहुत रूची थी तथा वे लेखन में भी रूची रखते थे। इसके चलते उन्होंने मुंबई के अपने घर राजगृह में ही एक समृद्ध ग्रंथालय का निर्माण किया था, जिसमें उनकी 50 हजार से भी अधिक किताबें थी। अपने लेखन द्वारा उन्होंने दलितों व देश की समस्याओं पर प्रकाश डाला।  उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा, बौद्ध धर्म, विज्ञानवाद, मानवतावाद, सत्य, अहिंसा आदि के विषय आम्बेडकरवाद के सिद्धान्त हैं। छुआछूत को नष्ट करना, दलितों में सामाजिक सुधार, भारत में बौद्ध धर्म का प्रचार एवं प्रचार, भारतीय संविधान में निहीत अधिकारों तथा मौलिक हकों की रक्षा करना, एक नैतिक तथा जातिमुक्त समाज की रचना और भारत देश प्रगती यह प्रमुख उद्देश शामिल रहे।