नई दिल्ली, 22 जुलाई, 2022ः कंपनियों को अपने कर्मचारियों के अपस्किलिंग, रीस्किलिंग (कौशल बेहतर करने) और डिजिटल लर्निंग में बड़ा निवेश करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। ये बात शुक्रवार को इंडस्ट्री 4.0 इंडिया सम्मिट 2022 (आई4आईसी) में चर्चा के दौरान उभर कर सामने आई। सम्मिट का आयोजन एम्प्लॉयबिलिटी.लाइफ द्वारा किया गया था।
भारत में टैलेंट मार्केटप्लेस में बदलाव पर एक दूसरे पैनल चर्चा में बोलते हुए, श्री रोहित झम्ब, एसोसिएट डायरेक्टर-रिक्रूटमेंट, एक्सेंचर इंडिया ने कहा कि वर्तमान में कर्मचारी उन आर्गेनाइजेशंस को पसंद करते हैं जहां वे अपने स्किल्स में वृद्धि की संभावनाएं देखते हैं।
उन्होंने कहा कि “वर्तमान दौर के कर्मचारी एक ऐसे आर्गेनाइजेशन में शामिल होना चाहते हैं जो अपस्किलिंग, रीस्किलिंग और लर्निंग में महत्वपूर्ण ढंग से निवेश करता है। महामारी के बाद के बदले हुए माहौल में, कर्मचारी उन कार्यस्थलों पर भी ध्यान दे रहे हैं जो काम करने के लिए फिजिकल और डिजिटल दोनों दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।”
श्री झम्ब ने वर्कप्लेस इकोसिस्टम में सुधार के लिए कर्मचारियों और सहकर्मियों के प्रति सौम्य व्यवहार की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि नौकरी बाजार हमेशा से कर्मचारियों द्वारा संचालित बाजार रहा है, न कि नियोक्ताओं द्वारा संचालित होता है।
एस. श्रीनिवास शिवकुमार, चीफ डिजिटल एडवाइजर, माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि रिमोट सिस्टम से काम करने की क्षमता, और यह दिखाने के लिए कि कर्मचारी अपने कार्यालयों से दूर रिमोट मोड में काम करने के बावजूद उत्पादक हो सकते हैं, महामारी के दौरान हासिल की गई सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।
पैनल चर्चा में बोलते हुए, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में सीएचआरओ और सीएफओ सीमा सिंह ने कहा कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की सबसे बड़ी चुनौती देश के हर नुक्कड़ और कोने में लोगों तक पहुंचना और दरवाजे पर आवश्यक सेवाएं प्रदान करना था।
उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान हमें सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के पास पहुंचने के लिए बैंक की वर्कफोर्स को तैयार करना, जहां लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे थे, लेकिन उन्हें पैसे की जरूरत थी, उन्हें सेवाओं की जरूरत थी और यही वह समय था जब हमारा संगठन-वास्तव में बैंकर-मैदान में आए और ग्राहकों के साथ सीधा संपर्क कायम किया।”
उन्होंने यह भी कहा कि प्रमुख बदलाव आईपीपीबी के कर्मचारियों का पारंपरिक बैंकिंग कार्यक्रम से डिजिटल बैंकिंग प्रणाली में बदलाव था।
इंडस्ट्री 4.0 प्रतिभा परिदृश्य के लिए संस्थागत परिवर्तन पर तीसरे पैनल चर्चा में भाग लेते हुए, डॉ.विश्व मोहन बंसल, चेयरमैन, न्यू दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ने उच्च अधिकारियों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुखों से खुले दिमाग से इस दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि “रिएक्टर्स, प्रिंसिपल और उच्च अधिकारियों की मानसिकता खुली होनी चाहिए। वे यह देखने के लिए बहुत खुली सोच नहीं रखते हैं कि अगले 20 वर्षों में क्या होने वाला है।“ उन्होंने कहा कि रेगुलेटर्स और वरिष्ठ शिक्षाविद अभी भी अपने काम करने के पुराने तरीकों में फंसे हुए हैं।
डिजिटल कौशल की ओर भारत के परिवर्तन के बारे में विश्वास व्यक्त करते हुए, एमिटी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो.पी.बी. शर्मा ने कहा कि भारत डिजिटल स्किल में परिवर्तन हासिल करने के लिए आत्मविश्वास और क्षमता के साथ आगे बढ़ेगा।
उनका विचार था कि डिजिटल लर्निंग को मेंटरिंग के बजाय अधिक सेल्फ-लर्निंग की आवश्यकता होगी, और कहा कि सेल्फ-लर्निंग के मामले में “भारत फायदे का गठबंधन है”।
इस चर्चा में दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. नेहारिका वोहरा और एमएस रमैया यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के वाइस चांसलर डॉ. कुलदीप रैना भी मौजूद थे।
आई4आईसी की कल्पना सरकार, शिक्षा जगत और कॉर्पाेरेट क्षेत्र के अग्रणी लोगों को एक साथ लाकर डिजिटल कौशल अंतर के गंभीर रूप से जरूरी मुद्दे को संबोधित करने के लिए की गई है। साथ में वे भारत और व्यापक दुनिया के लिए डिजिटल कौशल अंतर चुनौती को पूरा करने के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए आगे की योजना बनाएंगे। इस सम्मिट ने इंडस्ट्री 4.0 के परिवर्तन को एक चुनौती और एक अवसर दोनों के रूप में तैयार किया है। नई प्रतिभा परिदृश्य की मांग बहुत बड़ी है, लेकिन क्रिएटिव समाधान और शिक्षा प्रसार में नए व्यापार मॉडल के इनोवेशन की बहुत गुंजाइश है।
