रोटी बैंक सेक्टर-19 फरीदाबाद द्वारा बैसाखी उत्सव सेक्टर-19 फरीदाबाद स्थित कम्युनिटी सेंटर में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम कर धूमधाम से मनाया गया
फरीदाबाद, 11 अप्रैल। रोटी बैंक सेक्टर-19 फरीदाबाद द्वारा बैसाखी उत्सव सेक्टर-19 फरीदाबाद स्थित कम्युनिटी सेंटर में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम कर धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय ऊर्जा एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर उपस्थित रहे, विशिष्ठ अतिथि फरीदाबाद के विधायक नरेंद्र गुप्ता व बड़खल की विधायक सीमा त्रिखा थे। वहीं मुख्यमंत्री हरियाणा के राजनीतिक सचिव अजय गौड़, व समाजसेवी देवेंद्र गर्ग की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता चुन्नीलाल चोपड़ा ने की जबकि सफल मंच संचालन सतीश ठक्कर ने किया। इस अवसर पर विभिन्न ग्रुपों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी, जिन्हें देकर दर्शक वाह-वाह कर उठे। वहीं कोरोना काल में जनसेवा करने वाली सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम ‘जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल’ के नारों से गूंज उठा।
इस अवसर पर उपस्थित जनों को बैसाखी पर्व की बधाई देते हुए हुए मुख्य अतिथि कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि दरअसल बैसाखी एक लोक पर्व है जिसमें फसल पकने के बाद उसके कटने की तैयारी का उल्लास साफ तौर पर दिखाई देता है। यह पर्व पूरी दुनिया को भारत के करीब लाता है। उन्होंने कहा कि बैसाखी पर्व का दिन सौर नव वर्ष की शुरुआत के रूप में जाना जाता है। इस दिन देशवासी अनाज की पूजा करते हैं और फसल के कटकर घर आ जाने की खुशी में भगवान और प्रकृति को धन्यवाद करते हैं।
वहीं विशिष्ट अतिथि विधायक नरेंद्र गुप्ता व सीमा त्रिखा ने संयुक्त रूप से कहा कि सूर्य की स्थिति परिवर्तन के कारण इस दिन के बाद धूप तेज होने लगती है और गर्मी शुरू हो जाती है। इन गर्म किरणों से रबी की फसल पक जाती है, इसलिए किसानों के लिए ये एक उत्सव की तरह है। इसके साथ ही यह दिन मौसम में बदलाव का प्रतीक माना जाता है। अप्रैल के महीने में सर्दी पूरी तरह से खत्म हो जाती है और गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है। मौसम के कुदरती बदलाव के कारण भी इस त्योहार को मनाया जाता है।
वहीं सेवादार सुनील कुमार व टेकचंद नन्द्राजोग (टोनी पहलवान) ने कहा कि बैसाखी, दरअसल सिख धर्म की स्थापना और फसल पकने के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है। इस महीने रबी फसल पूरी तरह से पक कर तैयार हो जाती है और पकी हुई फसल को काटने की शुरुआत भी हो जाती है। ऐसे में किसान खरीफ की फसल पकने की खुशी में यह त्योहार मनाते हैं। 13 अप्रैल 1699 के दिन सिख पंथ के 10वें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी, इसके साथ ही इस दिन को मनाना शुरू किया गया था।
बैसाखी उत्सव में दिनेश छाबड़ा, जेएम शर्मा, पवन डाबर, जय किशन टूटेजा, दीवान गांधी, डा. कौशल बाटला, सरजू आहूजा, बोधराज मक्कड़, अशोक धींगड़ा, अकिल सलमानी, बशीर खान, कुलदीप सिंह साहनी, सुरेश पंजाबी, विजय शर्मा, मुकेश सैनी, डा. सुरेंद्र दत्ता, राजिंदर मिगलानी, सुरजीत कथूरिया, भगवान दास गेरा आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
