Kaagaz Review: सिस्टम की बैंड बजाकर ज़िंदा हुए एक जुनूनी शख्स की कहानी में पंकज त्रिपाठी ने फूंकी…
नई दिल्ली। कागज़ वैसे तो बेजान है, मगर किसी के लिए जान से ज़्यादा कीमती हो सकता है। ख़ासकर तब, जबकि उसके ज़िंदा होने का सबूत ही कागज़ हो। आंखों के सामने खड़े हाड़-मांस के आदमी का पूरा वजूद सिर्फ़ एक कागज़ पर टिका हो। कागज़ नहीं तो आदमी…
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