बॉर्डर पर किसान रो रहे खून के आंसू ,इधर भाजपा का साथ देने वाले आजाद विधायक नयनपाल रावत ढोल बजा मना रहे खुशियां
जंगशेर राणा /चंडीगढ़। तीन कृषि बिलो के विरोध में किसान बॉर्डर पर लगातार धरना दे रहे हैं। प्रदेश के किसान इस वक्त भारी रोष व तकलीफ से दो चार हो रहे हैं। अभी तक 180 से ज्यादा किसानों ने दम तोड़ दिया है। किसानों के इस दुख पर भी भाजपा को समर्थन देन रहे निर्दलीय विधायक और वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के चेयरमैन नयनपाल रावत होली के दिन खुशियों में यूं मशगूल थे कि ढोली के कंधे से ढोल उतार खुद ही बजाने लगे।
बॉर्डर पर किसानों ने कृषि बिल की प्रतियां जला कर रोष प्रकट किया, लेकिन भाजपा का साथ दे रहे नयनपाल रावत के लिए यह दिन जश्न मनाने का हैं।किसानों ने विधायक की कड़ी आलोचना की है। युवा किसान नेता प्रमोद चौहान ने बताया कि यह देख कर बहुत ही तकलीफ हुई कि सत्ता के लालच में भाजपा का साथ दे रहे यह नेता किस हद तक पहुंच गए हैं।
यूथ फॉर चेंज के अध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने बताया कि विधायक का इस तरह से सार्वजनिक तौर पर होली की खुशी का इजहार करने से बचना चाहिए था। यह न सिर्फ किसानों का मजाक उड़ाने जैसा है, बल्कि कोविड की वजह से सरकार ने भी सार्वजनिक रूप से होली मनाने पर रोक लगा रखी थी। विधायक यदि किसानों की भावना की कद्र नहीं कर सकते थे, तो कम से कम अपनी सरकार के दिशानिर्देश का पालन तो करना ही चाहिए था।
नयनपाल रावत पृथला से आजाद विधायक है, उन्होंने भाजपा सरकार को समर्थन दे रखा है। इस बार विधानसभा सत्र में जब किसान बिलों पर कांग्रेस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आयी थी, तब भी नयनपाल रावत ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया था। सरकार को समर्थन देने पर उन्हें वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के चेयरमैन के पद से नवाजा गया था।
किसान नेताओं का कहना है कि इस तरह के विधायकों की वजह से ही आज किसानों को यूं मारे मारे घर से दरबदर होना पड़ रहा है। इस तरह की सोच के नेता वोट के वक्त तो किसानों व गरीबों की बात करते हैं, लेकिन जीतने के बाद उनके लिए किसान और मजदूर कोई मायने नहीं रखता।
किसान नेताओं ने कहा कि इस बार तो नयनपाल जैसे नेता विधायक बन गए, लेकिन उनकी असलियत जनता के सामने आ गई है। उन्हें किसानों के खून के आंसू दिखायी नहीं दे रहे हैं। इससे यहीं साबित होता है यह सिर्फ सत्ता के लोभी है, इस कारण जनता इनसे इतनी नाराज है कि यह अपने इलाके में सार्वजनिक कार्यक्रम तक नहीं कर पा रहे हैं। किसानों ने बताया कि इस तरह के नेता का सार्वजनिक बहिष्कार होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि नयनपाल रावत जैसे विधायक को अब किसानों से जरा सी भी हमदर्दी है तो तुरंत सरकार को दिया गया समर्थन वापस लें, इसके साथ ही चेयरमैन का पद भी छोड़ दें। किसानों ने यह भी मांग की कि विधायक तुरंत ही माफी भी मांगे। क्योंकि यह न सिर्फ किसानों का अपमान है, बल्कि पृथला के मतदाताओं का भी अपमान है।यहां के मतदाताओं ने उन्हें इसलिए चुना था कि क्योंकि उन्हें उस पर यकीन था, लेकिन वह मतदाताओं के विश्वास पर खरे उतरते नजर नहीं आ रहे हैं।
होली के दिन विधायक नयनपाल रावत के ढोल बजा कर खुशियां मनाने पर किसान नेताओं ने रोष जताया। उनका कहना है कि इससे पता लग रहा है कि भाजपा और उसे समर्थन देने वाले आजाद विधायक किस तरह से किसानों की तकलीफ पर जश्न मना रहे हैं। उन्होंने मतदाताअों से अपील की कि इस तरह के लोगों को आने वाले चुनाव में हर हालत में किसान और मजदूर सबक सीखाएंंगे।
