बीमारी के साथ भी जी सकते खुशहाल जिंदगी : डा. जितेंद्र कुमार

बदलती जीवनशैली से बढ़ रहे है किडनी खराब होने के मामले
फरीदाबाद। बदलते जीवनशैली से दूसरी बीमारियों के साथ-साथ किडनी खराब होने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। एक बार किडनी की बीमारी हो गई तो ज्यादातर लोग जिंदगी से हताश हो जाते हैं, जबकि सच यह है कि अगर सही से इलाज कराया जाए और पूरी सावधानियां बरती जाएं तो किडनी खराब होने के बाद भी मरीज लंबी ठीक-ठाक जिंदगी जी सकता है। विश्व किडनी दिवस पर यह कहना है कि सेक्टर-16ए स्थित मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार का। शहर के वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि किडनी फेल्योर एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है। किडनी की बीमारी से ज्यादा उसका डर लोगों को ज्यादा परेशान करता है। किडऩी रोग के दौरान यह भी संभव है कि परहेज करते हुए स्वादिष्ट और पौष्टिक खाना खाकर स्वस्थ्य और खुशहाल जीवन जी सकते हैं। इस विषय पर जागरुकता लाने काफी जरूरत है। आमतौर पर देखा गया है कि जैसे ही मरीज को किडऩी से संबंधित बीमारी का पता चलता है। मरीज मानसिक तनाव का शिकार हो जाता है। ऐसे में वह अपने खान-पान की ओर भी ध्यान नहीं दे पाता। उन्होंने कहा कि किडऩी रोग के दौरान समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए और समय पर दवाओं का सेवन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि घर के साथ खेती की पूरी जिम्मेदारी संभालने वाले मथुरा निवासी दर्शन शर्मा ने बताया वर्ष 2016 में शुरुआत में बुखार आया तो मथुरा के अस्पताल में भर्ती हो गया। वहां से चार दिन बाद डिस्चार्ज कर दिया। अगले दिन घर पहुंचने पर रात के तेज सिर दर्द होने लगा। घर वालों ने फिर एक बड़े अस्पताल में दिखाया तो पता चला किडनी फेल हो गई। ये सुन कर मैं बहुत घबरा गया था। मथुरा में इलाज के बाद जयपुर चला गया। इस बीच एक साल तक होम्योपैथकि दवाई चली। इससे ठीक होने की बजाये किडनी में जो थोड़ी बहुत जान थी। वह भी खत्म हो गई। इसके बाद फरीदाबाद में वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार के संपर्क में आया। डॉक्टर ने मेरा हौसला बढ़ाया। बहन ने किडनी डोनेट की। इलाज के बाद अब पूरी तरह स्वस्थ हूं। वहीं सेक्टर-91 निवासी 37 वर्षीय ज्योति राव ने बताया कि वर्ष 2016 में बेटा होने पर किडनी की समस्या का पता चला था। पति विकास राव ने बताया उनकी किडनी फेल हो गई। ये सुन कर मैं बहुत परेशान हो गई। एक महीने अस्पताल में रही। काफी समय आईसीयू में रही। ठीक होने के बाद डायलिसिस पर जाने लगी। मानसिक तनाव बढ़ गया था। पति और परिवार वालों ने मुझे संभाला। डॉक्टर जितेंद्र के संपर्क में आई तो उन्होंने काफी हौंसला बढ़ाया। मुझे साढे चार साल हो गए। अब मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। घर के सभी काम करती हूं। सुबह बच्चों को स्कूल छोडक़र आती हूं। पति के लिए खाना बनाती हूं। इसके बाद अकेली अपनी डायलिसिस के लिए अस्पताल जाती हूं।