श्री धार्मिक लीला कमेटी में अंगद ने पाँव जमाया और लक्ष्मन मूर्छित हुआ- हरीश चन्द्र आज़ाद

श्री धार्मिक लीला कमेटी में अंगद ने पाँव जमाया और लक्ष्मन मूर्छित हुआ- हरीश चन्द्र आज़ाद

पाँव छूने से मेरे न हरगिज़ मुक्ति पायेगा, पाँव छू ले श्रीराम के जो चाहेगा मिल जायेगा

सर्वप्रिय भारत/फरीदाबाद।

श्री धार्मिक लीला कमेटी के निर्देशक हरीश चन्द्र आज़ाद ने बताया कि कल रात मंच पर अंगद ने रावण के योद्वााओं का बल आजमाने के लिये पाँव जमाया व मेघनाथ ने शक्तिबाण मारकर लक्ष्मन को मूर्छित किया। प्रथम दृश्य में हुनमान लंका से माता सीता की खोज करके श्रीराम के पास आते हैं तो प्रभू राम जामवंत के कहने पर अंगद को दूत बनाकर रावण के पास भेजते हैं ताकि युद्व में व्यर्थ खून न बहे।

अगले दृश्य में अंगद रावण के दरबार में जाकर रावण को समझाता है कि माता सीता को श्रीराम को लौटाकर युद्व से बचे लेकिन रावण घमंड में चूर होकर अंगद की बात नही मानता तब अंगद रावण के ताकतवर पुत्रों और भाइयों का बल आजमाने के लिय अपना पाँव जमीन में जमाता है और उसे उठाने के लिये सबको कहता है लेकिन निकुम्भ, मेघनाथ व कुंभकरण सहित कोई अंगद का पाँव हिला तक नही पाते हैं तब रावण स्वंम पाँव उठाने लगता है तो अंगद पाँव हटाकर कहता है कि पाँव छूने से मेरे न हरगिज़ मुक्ति पायेगा, पाँव छू ले श्रीराम के जो चाहेगा मिल जायेगा। पहली बार अंगद का किरदार निभा रहे हार्दिक बत्तरा न अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता तो रावण के अभिनय में तेजिन्द्र खरबंदा, मेघनाथ के रोल में पंकज बत्तरा, कुम्भकरण के किरदार में गुलशन नागपाल ने गजंब का अभिनय किया।

अगले दृश्य में मेघनाथ लक्ष्मन का युद्व होात है जिसमें मेघनाथ लक्ष्मन को शक्तिबाण चलाकर मूर्छित कर देता है उसके बाद श्रीराम लक्ष्मन को मूर्छित देखकर बहुत विलाप करते हैं और विभिषण के कहने पर हनुमान सुषैन वैध को लंका से लाते हैं और फिर वैध के कहने पर हनुमान संजीवनी बूटी लेने पर्वतों पर जाते है लेकिन संजीवनी की पहचान न होने की वजह से हुनमान पूरा पहाड़ ऊठाकर लाते हैं फिर लक्ष्मन के प्राण बच पाते हैं। रास्ते में हनुमान का सामना कालनेमी राक्षस उनका रास्ता रोकता है लेकिन हनुमान उसको मार देता है। मेघनाथ बने पंकज बत्तरा, कालनेमी बने पंकज खरबंदा, विभिषण बने संचित, सुग्रीव बने अमित नागपाल, सुषैन वैध बने मनीष रोहिला, जामवंत बने हरीश कुमार ने अपनी अदभुत कला का पर्दशन किया।