इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस थीम ‘परिवार और शहरीकरण’ पर मनाया जा रहा है।राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन आई टी तीन फरीदाबाद की जूनियर रेडक्रॉस, गाइड्स और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड ने प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा की अध्यक्षता में अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच पारिवारिक संबंध के महत्व को उजागकर और स्थापित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा और प्राध्यापिका अंशुल ने कहा कि कोरोना काल के लॉकडाउन ने लोगों को अपने परिवार से जोड़कर उसके महत्व को समझा दिया था। हमें चाहिए कि जब भी परिवार दिवस आए तो हमें अपने परिवार के साथ ही समय बिताना चाहिए। परिवार को समय देना, परिवार के सदस्यों की भावना को समझना, उनकी समस्याओं का समाधान करना। परिवार से बड़ा कोई धन नहीं। कैसा भी संकट हो सबसे पहले परिवार के लोग ही सामने खड़े मिलते हैं। यदि परिवार में आपसी प्रेम, सम्मान और सद्भाव है तो किसी भी प्रकार का रोग और शोक नहीं रहता है। परिवार समाज की ईकाई है और समाज देश की। देश एक परिवार है।अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस परिवार और संयुक्त परिवार के महत्व को दर्शाने और उसकी उपयोगिता को प्रकट करने के लिए ही मनाया जाता है। इतिहास, उद्देश्य और महत्व को प्रदर्शित करने के लिए ही इस दिवस का प्रारंभ किया गया। प्राचीन भारतीय सभ्यता में संयुक्त परिवार हुआ करते थे। शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण संयुक्त परिवार अब गांव में ही पाए जाते हैं। शहरीकरण और शहर की प्रतिस्पर्धा, भौगदौड़ और महत्वकांक्षा ने परिवार को तोड़ दिया है। जूनियर रेडक्रॉस और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड प्रभारी प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने कहा कि परिवार को सम्बल प्रदान करने की विशेषता सिर्फ संयुक्त परिवार में ही होती है। भारत एकल परिवार की ओर बढ़ चला है जब कि अमेरिका और यूरोप में संयुक्त परिवार के महत्व को अब समझा जाने लगा है। परिवार की एकता ही उसकी शक्ति की परिचायक होती है परंतु अब परिवार भी बिखरने लगे हैं। प्राचार्य मनचंदा ने कहा कि परिवार हमारी प्राथमिक पाठशाला है। परिवार के साथ ही हम अपनी सभी तरह की समस्यों को साझा करके उसका समाधान पा सकते हैं। संयुक्त परिवार में बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास अच्छे से होता है। संयुक्त परिवार में रोगी की देखभाल, खानपान और उचित व्यवस्था परिवार के लोग ही कर लेते हैं। परिवार में यदि एकता है तो किसी भी प्रकार के दु:ख और संकट का प्रभाव किसी पर भी नहीं होता है और तुरंत ही उसका समाधान भी निकल आता है। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा और प्राध्यापिका अंशुल ने छात्राओं राधिका, शाइन, दिव्या, अनम, किरण, आरती और वंशिका का परिवार के महत्व को दर्शाने के लिए अभिनंदन किया।
