लाजपत ऑडिटोरियम में विष्णु मित्तल की गरिमामयी उपस्थिति, दिव्यांग बच्चों को मिली व्हीलचेयर और सम्मान

व्हीलचेयर दान से सजी “एक शाम देश के नाम”, विष्णु मित्तल की मौजूदगी में भावुक हुआ लाजपत ऑडिटोरियम

लाजपत ऑडिटोरियम में विष्णु मित्तल की गरिमामयी उपस्थिति, दिव्यांग बच्चों को मिली व्हीलचेयर और सम्मान

व्हीलचेयर दान से सजी “एक शाम देश के नाम”, विष्णु मित्तल की मौजूदगी में भावुक हुआ लाजपत ऑडिटोरियम

सर्वप्रिय भारत/नई दिल्ली/ ऊषा शर्मा

कुछ शामें सिर्फ तारीख नहीं होतीं, वे इतिहास बन जाती हैं। दिल्ली के लाजपत ऑडिटोरियम में आयोजित “एक शाम देश के नाम” भी ऐसी ही एक शाम थी—जहां मंच पर दिव्यांग बच्चों के कदम थे और सभागार में बैठी हर आंख नम थी। यह आयोजन किरण देवी फाउंडेशन के डायरेक्टर प्रकाश, नेशनल प्रेजिडेंट विकास और डीकेएसडी कपूर लाडली नूर फाउंडेशन के प्रेजिडेंट राजिंदर कपूर सेकेंट्री सुल्ताना द्वारा आयोजित किया गया इसमें सपोर्टिंव पार्टनर रहे प्रथम एजेंडा राष्ट्रीय दैनिक अख़बार हनी प्रियंका महाजन, ओमकार टीवी – काजल यह आयोजन मनोरंजन नहीं था, यह आत्मसम्मान, साहस और उम्मीद का उत्सव था। जैसे ही मंच पर दिव्यांग बच्चों ने रैम्प वॉक, डांस, सिंगिंग की, ऐसा लगा मानो आत्मविश्वास खुद चलकर सामने आ गया हो। जिन बच्चों को समाज अक्सर दया की नजर से देखता है, उन्होंने उस शाम अपनी मुस्कान, हुनर और हौसले से यह साबित कर दिया कि कमजोरी शरीर में नहीं, सोच में होती है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा दिल्ली के महासचिव विष्णु मित्तल जब मंच पर पहुंचे तो पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। अपने भावुक और प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने कहा—
“ये बच्चे ईश्वर का वरदान हैं। इनमें वो ताकत है जो बड़े-बड़े लोगों में नहीं होती। अगर इन्हें सम्मान और अवसर मिले, तो ये देश का नाम रोशन कर सकते हैं।” उनके शब्द सिर्फ भाषण नहीं थे, बल्कि मंच से उतरकर उन्होंने अपने कर्म से भी यह साबित किया। साथ ही किरण देवी फाउंडेशन ने जरूरत मंद बच्चों को व्हील चेयर बाँटी और साथ ही विष्णु मित्तल के कर-कमलों से जब दिव्यांग बच्चों को व्हीलचेयर प्रदान की गई, तो उस पल ने पूरे सभागार को भावुक कर दिया।
कई माता-पिता की आंखों से आंसू बह निकले—वे आंसू दुख के नहीं, सम्मान और उम्मीद के थे। इस प्रेरणादायी आयोजन के पीछे किरण देवी फाउंडेशन, DKSD कपूर लाडली नूर फाउंडेशन और कार्यक्रम की आत्मा, प्रकाश कुमार और मीडिया पर्सनालिटी हनी महाजन का अथक प्रयास रहा। इन्होने सिर्फ आयोजन ही नहीं किया बल्कि हर बच्चे को ऐसा मंच दिया, जहां वह खुद को “कमजोर” नहीं, बल्कि खास महसूस कर सके। कार्यक्रम में लगभग 100 दिव्यांग बच्चों ने नृत्य, गायन और रैम्प वॉक की प्रस्तुतियों से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती। जब एक नन्ही बच्ची व्हीलचेयर पर बैठकर मुस्कुराती हुई रैम्प पर आगे बढ़ी, तो पूरा ऑडिटोरियम खड़ा होकर तालियां बजाने लगा। उस पल तालियां नहीं, दुआएं बरस रही थीं।

कार्यक्रम में विशेष रूप से रणवीर सिंह, सुनीता चौधरी, सोनिका नागर, जुनेद, डॉक्टर के बी शर्मा, सौरभ गुप्ता, जितेंद्र, रिया एवं बब्बू खान की उपस्थिति ने आयोजन को और भी गरिमा प्रदान की। सभी अतिथियों ने मंच पर पहुंचकर दिव्यांग बच्चों से मुलाकात की, उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।अतिथियों के स्नेहपूर्ण व्यवहार और प्रोत्साहन से बच्चे भावुक नजर आए, वहीं उपस्थित दर्शकों ने इस दृश्य को मानवीय संवेदनाओं से भरपूर बताया।

*मुख्य अतिथियों के भावुक संदेशों ने “एक शाम देश के नाम” को बनाया ऐतिहासिक*

विष्णु मित्तल (महासचिव, भाजपा दिल्ली – मुख्य अतिथि) अपने संबोधन में विष्णु मित्तल ने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि— “ये बच्चे किसी भी दृष्टि से कमज़ोर नहीं हैं। समाज ने इन्हें कमज़ोर समझ लिया, जबकि सच्चाई यह है कि इनमें वह ताकत है, जो कई सामान्य लोगों में भी नहीं होती। दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं, बल्कि ईश्वर की ओर से दी गई एक विशेष जिम्मेदारी है। अगर इन्हें सम्मान, अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो ये बच्चे देश और समाज का नाम रोशन कर सकते हैं।”उन्होंने आगे कहा—“हमारी जिम्मेदारी सिर्फ भाषण देने की नहीं है, बल्कि ज़मीन पर उतरकर इनके जीवन को आसान बनाने की है। आज जब इन बच्चों को व्हीलचेयर दी जा रही है, तो यह सिर्फ एक सहायता नहीं, बल्कि यह संदेश है कि समाज इनके साथ खड़ा है। ऐसे आयोजनों से ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण होता है।”

राम खिलाड़ी यादव (भाजपा महासचिव, ओबीसी मोर्चा)*राम खिलाड़ी यादव ने कहा*—आज मंच पर हमने बच्चों को नहीं, उनके हौसले को चलते देखा। ‘एक शाम देश के नाम’ जैसे कार्यक्रम दिव्यांग बच्चों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देते हैं और समाज को यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि हमें इनके प्रति अपना नजरिया बदलना होगा। यह आयोजन समाज के लिए एक आईना है।”

राजिंदर कपूर (प्रेसिडेंट मेडल अवॉर्डी, सीनियर चीफ वार्डन – सिविल डिफेंस)
*राजिंदर कपूर ने भावुक होते हुए कहा*—आज का कार्यक्रम देखकर दिल भर आया। इन बच्चों की आंखों में सपने हैं और उनके कदमों में आत्मविश्वास। ऐसे मंच बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को बाहर लाते हैं और उन्हें यह एहसास कराते हैं कि वे भी इस समाज की मुख्यधारा का हिस्सा हैं।”

श्याम जाजू (पूर्व उपाध्यक्ष)
*श्याम जाजू ने कहा*
“‘एक शाम देश के नाम’ जैसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। जब हम दिव्यांग बच्चों को सम्मान देते हैं, तो असल में हम अपने समाज और राष्ट्र की आत्मा को मजबूत करते हैं। यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है।”

*तरविंदर सिंह मारवाह (विधायक, जंगपुरा)* तरविंदर सिंह मारवाह ने कहा—इन बच्चों की प्रतिभा देखकर यह साबित होता है कि कमी शरीर में नहीं, सोच में होती है। अगर इन्हें बराबर के अवसर मिलें, तो ये हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। आज का आयोजन हम सबके लिए प्रेरणा है।”

*योगिता सिंह (चेयरमैन, सेंट्रल ज़ोन)* योगिता सिंह ने कहा
“यह आयोजन समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता है। ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से होने चाहिए, ताकि दिव्यांग बच्चों को लगातार प्रोत्साहन और सम्मान मिलता रहे।”

*गौरव सैनी (सुपरिटेंडेंट, रोहिणी जेल)* गौरव सैनी ने कहा* यह कार्यक्रम इंसानियत को जगाने वाला है। आज यहां आकर यह एहसास हुआ कि अगर समाज एकजुट हो जाए, तो किसी भी दिव्यांग बच्चे की राह मुश्किल नहीं रह जाती।”

*पूर्व एसीपी वीरेंद्र पुंज* ने भी की कार्यक्रम की प्रशंसा – कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व एसीपी वीरेंद्र पुंज ने “एक शाम देश के नाम” आयोजन की खुलकर तारीफ़ की। उन्होंने कहा—आज मैंने मंच पर केवल बच्चों को नहीं, उनके हौसले, आत्मविश्वास और जज़्बे को देखा। ऐसे कार्यक्रम समाज को यह संदेश देते हैं कि दिव्यांगता किसी की क्षमता या प्रतिभा को सीमित नहीं कर सकती। किरण देवी फाउंडेशन और DKSD कपूर लाडली नूर फाउंडेशन की यह पहल न सिर्फ बच्चों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सशक्त उदाहरण बन गई है।”

*विश्व प्रसिद्ध जादूगर शंकर सम्राट ने की आयोजन की सराहना* कार्यक्रम में उपस्थित विश्व प्रसिद्ध जादूगर शंकर सम्राट ने “एक शाम देश के नाम” आयोजन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि—“मैंने देश-विदेश में अनेक मंच देखे हैं, लेकिन आज यहां जो दृश्य मैंने देखा, वह दिल को छू लेने वाला है। दिव्यांग बच्चों के चेहरे पर जो आत्मविश्वास, मुस्कान और गर्व दिखा, वही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता है। यह कार्यक्रम केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानवता और संवेदना का जीवंत उदाहरण है।”
शंकर सम्राट ने आगे कहा—
“किरण देवी फाउंडेशन, DKSD कपूर लाडली नूर फाउंडेशन और इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों ने यह साबित कर दिया है कि जब नीयत नेक हो, तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। ऐसे आयोजन बच्चों को यह एहसास कराते हैं कि वे अकेले नहीं हैं, पूरा समाज उनके साथ खड़ा है।”
उन्होंने प्रकाश के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि—प्रकाश जैसी सोच और संवेदनशीलता रखने वाले लोग अगर आगे आएं, तो समाज और देश दोनों का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।”

सांस्कृतिक संध्या में मोंटू मस्त, नंद किशोर, अशू पंजाबी और हैप्पीनेस गुलाटी ने जब गीतों की प्रस्तुति दी, तो माहौल उम्मीद और उल्लास से भर गया। सेलिब्रिटी सिंगर वीर दहिया की आवाज़ पर हर कोई झूम उठा, लेकिन असली सितारे तो वो बच्चे थे, जो हर प्रस्तुति के बाद और मजबूत होकर उभरे। साथ ही नन्हे नन्हे बच्चों को सुजाता मकेओवर की टीम ने तैयार किया.

कार्यक्रम के अंत में ऑडिटोरियम में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। लोग उठते वक्त सिर्फ तालियां नहीं बजा रहे थे, बल्कि अपने दिल से एक वादा लेकर जा रहे थे—कि अब इन बच्चों को सिर्फ सहानुभूति नहीं, समान अवसर और सम्मान मिलेगा।